अंतर्नाद
Friday, May 11, 2012
एकली
एकली उभी कदंबाखाली
ओलांडूनी गावाची वेस
!
प्रश्नांची गर्दी डोळ्यात दाटली
माथ्यावर भूरभूरती केस
!
अबोल बन्सुरी ती बोलू लागली
नाथा का धरीला परदेस
?
14-04-2012
मुक्ता पाठक शर्मा
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